पोला
























पोला त्योहार 9 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बैलों की पूजा होगी। समृद्धि का त्योहार पोला पर्व रविवार को उत्साह के साथ मनेगा। बाजार और सड़क किनारे मिट्टी के खिलौनों की दुकानें सज गई हैं। बाजार में लकड़ी के खिलौने भी बिक रहे हैं।
पोला पर्व पर कई जगह बैल दौड़ स्पर्धा कराकर परंपरा निभाई जाएगी। मंदिरों में भजन-कीर्तन होंगे। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में भाद्रपद कृष्ण पक्ष अमावस्या को पोला का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के वाहन बैलों की पूजा करने की परंपरा है। सुबह बैलों को नहलाकर भगवान शिव और उनके वाहन नंदी स्वरूप बैलों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार अमावस्या को सूर्योदय काल में तीर्थ स्थल, नदी, तालाब या घर में स्नान कर पितर तर्पण कर दान देने से पुण्य मिलता है।
छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्व तीजा पोला पर बेटियों का मायके आने का दौर शुरू हो गया है। पोला पर्व को किसान बड़े धूमधाम से मनाते हैं। लकड़ी व मिट्टी बैलों को रंग-बिरंगे कलर से सजाया जाता है। बैलों की पूजा के बाद पारंपरिक व्यंजन ठठेरी, खुर्मी, बोबरा व चीला का भोग लगाया जाता है।
बाजार में खिलौनों की सजी दुकानें
पोला के दिन मिट्टी व लकड़ी से बने बैलों और खिलौनों की भी पूजा की जाती है।

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