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ढेंकी

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महुआ

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छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों  मे महुए के पेड़ और इसके फलों का बहुत महत्व है। महुए के फलों को बीनना और बीनकर बेचना यहाँ के स्थानीय निवासियों विशेषकर जनजातियों के आजीविका का ये प्रमुख साधन है। महुए से शराब भी बनाई जाती है इसका उपयोग औषधी के रूप मे भी होता है। 

ढोकरा शिल्प मूर्तिकला

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यह दस्तकारों की एक प्राचीन कला है I  इस कला में तांबा, जस्ता व रांगा आदि धातुओं के मिश्रण की ढलाई करके मूर्तियां, ज्वैलरी, बर्तन, व रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला सामान बनाया जाता है I 

भाजी

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छत्तीसगढ़ मे लगभग 40 प्रकार की भाजियाँ पाई जाती हैं। स्थानीय निवासियों के द्वारा ये भाजियाँ सहज और सरल रूप से अपने कोला-बाड़ी मे लगाई जाती है। कुछ भाजियाँ तो साल भर पाई जाती हैं। छत्तीसगढ़ के निवासियों के द्वारा भाजियों का सेवन लगभग वर्ष भर किया जाता है। कुछ भाजियों के नाम इस प्रकार है- लाल भाजी पालक भाजी  कांदा भाजी बर्रे भाजी मेथी भाजी  तीव्र भाजी  प्याज भाजी  मखना भाजी  गोभी भाजी  करेला भाजी बरबटी भाजी  मुनगा भाजी  भाकरी भाजी  मिर्ची भाजी  सुनसुनिया भाजी तरोई भाजी  चेज भाजी  कर्मत्ता भाजी  बथुआ भाजी  उल्ला भाजी लाल भाजी  हमारी पटवा भाजी  सरसों भाजी  चरोटा भाजी  ककड़ी भाजी  खेड़हा भाजी पीपल भाजी  चना भाजी  एक स्थानीय शिक्षक श्री हरीशंकर यादव के द्वारा अपने स्कूल मे इन्हीं भाजियों को लेकर कुछ कम किया गया है उन्ही बातचीत के कुछ अंश- शिक्षक के अनुसार बच्चों ने समुदाय से प्रश्न किया कि पहले लोग बहुत सारी भाजियाँ खाया करते थे लेकिन पहले की त...

पोला

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पोला त्योहार 9 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बैलों की पूजा होगी। समृद्धि का त्योहार पोला पर्व रविवार को उत्साह के साथ मनेगा। बाजार और सड़क किनारे मिट्टी के खिलौनों की दुकानें सज गई हैं। बाजार में लकड़ी के खिलौने भी बिक रहे हैं। पोला पर्व पर कई जगह बैल दौड़ स्पर्धा कराकर परंपरा निभाई जाएगी। मंदिरों में भजन-कीर्तन होंगे। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में भाद्रपद कृष्ण पक्ष अमावस्या को पोला का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के वाहन बैलों की पूजा करने की परंपरा है। सुबह बैलों को न हलाकर भगवान शिव और उनके वाहन नंदी स्वरूप बैलों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार अमावस्या को सूर्योदय काल में तीर्थ स्थल, नदी, तालाब या घर में स्नान कर पितर तर्पण कर दान देने से पुण्य मिलता है। छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्व तीजा पोला पर बेटियों का मायके आने का दौर शुरू हो गया है। पोला पर्व को किसान बड़े धूमधाम से मनाते हैं। लकड़ी व मिट्टी बैलों को रंग-बिरंगे कलर से सजाया जाता है। बैलों की पूजा के बाद पारंपरिक व्यंजन ठठेरी, खुर्मी, बोबरा व...